"धीरेन्द्र शास्त्री के बयान पर माथुर चतुर्वेद परिषद एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के संरक्षक ने जताया कड़ा आक्रोश, बोले—माफी मांगने से आहत भावनाओं की गंभीरता कम नहीं होती।"

मथुरा। बागेश्वर धाम के महंत पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति कथित रूप से व्यक्त किए गए निरादरपूर्ण भाव एवं टिप्पणी को लेकर धार्मिक जगत में आक्रोश गहराता जा रहा है। इस प्रकरण पर श्री माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के संरक्षक, प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी पं. महेश चतुर्वेदी पाठक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

पं. महेश चतुर्वेदी पाठक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल किसी एक समाज, संप्रदाय अथवा क्षेत्र के आराध्य नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण सनातन संस्कृति के प्राण, भारतीय दर्शन के आधार और विश्व मानवता के मार्गदर्शक हैं। गीता का दिव्य ज्ञान देने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण के प्रति किसी भी प्रकार का निरादरपूर्ण भाव व्यक्त करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को आहत करने वाला है। उन्होंने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री ने भले ही अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली हो, लेकिन इस प्रकार की अमर्यादित अभिव्यक्ति को सामान्य भूल मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने देशभर के कथा वाचकों, संतों एवं धर्माचार्यों को विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा कि धार्मिक मंच कोई ऐसा स्थान नहीं है, जहां लोकप्रियता अथवा तालियां बटोरने के लिए किसी भी देवी-देवता, महापुरुष या आराध्य के विषय में मनमाने शब्दों का प्रयोग किया जाए। कथा वाचकों को अपनी जिव्हा पर संयम रखना चाहिए। उनके एक-एक शब्द का प्रभाव लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर पड़ता है। इसलिए धर्म की व्याख्या करते समय भाषा की मर्यादा, शास्त्रों का ज्ञान और धार्मिक गरिमा का ध्यान रखना अनिवार्य है।

पं. पाठक ने पूर्व में कथावाचक मुरारी बापू और प्रदीप मिश्रा से जुड़े विवादों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि समय-समय पर इस प्रकार की टिप्पणियों से धार्मिक समाज में असंतोष उत्पन्न हुआ है। ऐसे प्रकरणों से सभी धर्माचार्यों को सबक लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी आराध्य अथवा धार्मिक परंपरा के प्रति अनावश्यक विवाद की स्थिति पैदा न हो।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि संतों और कथावाचकों का दायित्व समाज को जोड़ना, सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा बढ़ाना और श्रद्धालुओं को सद्मार्ग दिखाना है, न कि अपनी वाणी से आस्था को चोट पहुंचाना। धर्म की प्रतिष्ठा वाणी की मर्यादा और आचरण की पवित्रता से ही कायम रहती है।
  पंडित महेश पाठक ने बताया कि हम धीरेन्द्र शास्त्री का अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा द्वारा संपूर्ण भारत वर्ष में विरोध किया जायेगा तथा ब्रज वासियों से ऐसे पाखंडी का बहिष्कार करने की अपील की प्रेस वार्ता का संचालन परिषद के महामंत्री संचालन संजय चतुर्वेदी ने किया 
   प्रेस वार्ता मैं परिषद के संरक्षक श्री राकेश तिवारी एडवोकेट ,तीर्थ पुरोहित महासभा के वरिष्ठ महामंत्री नवीन नागर, कमल मोला, नीरज चतुर्वेदी, संजय मंत्री, अनिल चतुर्वेदी, हरदेव ,सचिन उपस्थित थे