मथुरा। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके परसंस्कृति विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग ने फिजियोथेरेपी के योगदान, स्वास्थ्य, गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कई गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस अवसर पर फिजियोथैरेपी के विद्यार्थियों ने रील-मेकिंग, रंगोली-मेकिंग, स्लोगन राइटिंग और डिबेट जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता, ज्ञान, बातचीत के कौशल और टीम भावना का प्रदर्शन किया। इन गतिविधियों ने छात्रों को अपने विचारों को रचनात्मक रूप से व्यक्त करने के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान किया। साथ ही, इन्होंने बीमारी की रोकथाम, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन), कामकाज में आत्मनिर्भरता और समग्र स्वास्थ्य-कल्याण में फिजियोथेरेपी की भूमिका को भी उजागर किया।
फिजियोथैरेपी विभाग के शिक्षकों ने बताया कि फिजियोथेरेपी ने अनगिनत लोगों को चोट, बीमारी या सर्जरी के बाद ताकत, गतिशीलता और आत्मविश्वास वापस पाने में मदद की है। यह सिर्फ पुनर्वास से कहीं बढ़कर है, यह आत्मनिर्भरता बहाल करने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस हर साल 8 सितंबर को मनाया जाता है, ताकि इस क्षेत्र के महत्व को पहचाना जा सके और इसमें शामिल पेशेवरों को सम्मानित किया जा सके। इस विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर, हम उन फिजियोथेरेपिस्टों के महत्वपूर्ण योगदान को भी याद करते हैं जो स्वास्थ्य लाभ में सहायता करने, पुरानी बीमारियों का प्रबंधन करने और स्वस्थ, अधिक सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास करते हैं।
लोगों में जागरूकता के लिए आयोजित की गई प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने फिजियोथैरेपी के तरीकों और स्वस्थ निर्माण में इनके प्रयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विद्यार्थियों ने रंगोली-मेकिंग, स्लोगन राइटिंग और डिबेट जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से बताया कि कैसे लोगों को चोट, बीमारी या सर्जरी के बाद ताकत, गतिशीलता और आत्मविश्वास वापस पाने में फिजियोथैरेपी से मदद मिलती है। शिक्षकों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्रों की सक्रिय भागीदारी, रचनात्मकता, उत्साह और प्रयासों की सराहना की।