मथुरा के कच्ची सड़क बैराग पुरा निवासी श्रीमती पुष्पा शर्मा शिक्षा जगत की एक ऐसी प्रेरणादायी हस्ती हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण और ज्ञान के प्रसार को समर्पित किया है। एक समर्पित शिक्षिका के रूप में उन्होंने न केवल बच्चों को शिक्षा प्रदान की, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों का भी विकास किया।
सेवा निवृत्ति के पश्चात अधिकांश लोग अपने पेशेवर दायित्वों से विराम ले लेते हैं, लेकिन पुष्पा शर्मा जी ने शिक्षा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि अपना जीवन धर्म माना। यही कारण है कि 75 वर्ष की आयु में भी वे बच्चों को अध्यापन का कार्य कर रही हैं। उनका यह समर्पण और कर्मठता समाज के लिए प्रेरणा का विषय है। वे आज भी उसी उत्साह और निष्ठा के साथ बच्चों को शिक्षित कर रही हैं, जैसे अपने सेवाकाल के दौरान किया करती थीं।पुष्पा शर्मा का व्यक्तित्व केवल एक उत्कृष्ट शिक्षिका तक सीमित नहीं है, बल्कि वे परिवार और समाज के लिए भी आदर्श हैं। वे ऋतुराज शर्मा सहायक रजिस्ट्रार, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर की आदरणीय सासू माँ (मदर-इन-लॉ) हैं। उन्होंने अपने जीवन मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों से परिवार को सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। उनके व्यक्तित्व और विचारों का प्रभाव परिवार के प्रत्येक सदस्य के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।उनका जीवन यह संदेश देता है कि शिक्षा और समाज सेवा के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती। जब मन में सीखने और सिखाने का जज़्बा हो, तो व्यक्ति जीवन के हर पड़ाव पर समाज के लिए उपयोगी योगदान दे सकता है। पुष्पा शर्मा जी आज भी नई पीढ़ी को ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच प्रदान कर रही हैं, जो किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।आज के समय में, जब अनुभवी और मूल्यनिष्ठ मार्गदर्शकों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, तब पुष्पा शर्मा जी जैसी शिक्षिकाएँ समाज के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ हैं। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि सच्चा शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि जीवन भर ज्ञान और संस्कारों का प्रकाश फैलाता रहता है।श्रीमती पुष्पा शर्मा का जीवन सेवा, समर्पण, संस्कार और शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा की एक प्रेरक गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।