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Tuesday, 18th June,
2019
मथुरा ,प्रभारी मंत्री/राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह द्वारा गीता शोध संस्थान वृन्दावन स्थित यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय के सभागार में नारी शक्ति वन्दन अधिनियम- 2023 एवं महिला जन-आक्रोश के सम्बन्ध में प्रेस कॉन्फ्रेस की गई। उन्होंने कहा कि दिनांक 16 और 17 अप्रैल 2026 को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर विपक्षी पार्टियों ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपने महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्पष्ट कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। माननीय मंत्री जी ने कहा कि जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने विपक्ष के झूठ को बेनकाब करते हुए स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। विपक्षी दल कोटा के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक तकनीकी बहाना है। केंद्र एवं प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने हेतु इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ दृढ़ता से लड़ाई लड़ेगी। दिनांक 16 और 17 अप्रैल 2026 को संसद में संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर था। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही सदन में नहीं गिरा, बल्कि विपक्षी पार्टियां देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए। केंद्र एवं प्रदेश सरकार 16 और 17 अप्रैल 2026 को संसद में पूरे देश ने जो शर्मनाक, अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी आचरण विपक्षी गठबंधन का देखा, उसकी कड़ी निंदा करती है। इन दलों ने केवल संवैधानिक संशोधन या परिसीमन से जुड़े विधेयकों का विरोध नहीं किया, बल्कि भारत की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के साथ विश्वासघात किया है। माननीय मंत्री जी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भी निर्णय-निर्माण में महिलाओं को समान भागीदारी देने की बात आती है, ये दल राजनीतिक बहानों और देरी की दीवारें खड़ी कर देते हैं। विपक्षियों द्वारा दशकों तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने की साजिश, एक बार फिर उजागर हो गई। ये सभी दल लोकतंत्र के रक्षक होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ और तुष्टिकरण के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर कर रहे हैं। बविपक्ष के इस महिला-विरोधी रवैये के खिलाफ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के सामने सच्चाई रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में निर्णय लेने का समय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में हिस्सा देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है, जिसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक बंधक बनाए रखा। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने यह भी कहा कि जब सभी दल एक साथ आते हैं तो ऐसे मुद्दे राजनीतिक नहीं रह जाते और देश को लाभ होता है। उन्होंने हर सांसद से व्यक्तिगत और दलगत हितों से ऊपर उठने की अपील की। जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया, तब इन विपक्षी दलों ने चुनावों के दबाव में उसका समर्थन किया, लेकिन जब वास्तव में महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तो उनकी महिला-विरोधी सोच खुलकर सामने आ गई। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने चेतावनी दी कि देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैं, वे सक्रिय भागीदार हैं और चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। आज लाखों महिलाएं गांवों में पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं और निर्णय ले रही हैं, और अब वे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ऐसे में इस ऐतिहासिक अवसर को टालना केवल देरी नहीं, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रगति का गला घोंटना है, और इसके जिम्मेदार लोगों को हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने भी विपक्ष के झूठ के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन विधेयकों का मूल उद्देश्य "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य" के संवैधानिक सिद्धांत को प्रभावी ढंग से लागू करना है। परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व है, जिसे लंबे समय से टाला गया, जिससे प्रतिनिधित्व में गंभीर असंतुलन उत्पन्न हुआ है। माननीय गृहमंत्री जी ने साफ कहा कि विपक्षीय पार्टियों का विरोध प्रक्रिया या तरीके को लेकर नहीं, बल्कि महिलाओं को आरक्षण देने के मूल विचार के प्रति उनकी असहमति से प्रेरित है। इतिहास गवाह है कि जिसने शाह बानो मामले में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया और तीन तलाक जैसी प्रथा का समर्थन किया, वह महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने के विचार को स्वीकार नहीं कर सकता। माननीय मंत्री जी ने कहा कि विपक्षियों ने दशकों तक तकनीकी बहानों, समितियों और खोखली बहसों के माध्यम से महिला आरक्षण को लंबित रखा और जब भी पिछड़े वर्गों को अधिकार देने की बात आई, उसने आयोगों की रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देना उनके लिए आसान था क्योंकि वहां उनकी अपनी राजनीतिक स्थिति प्रभावित नहीं होती थी, लेकिन संसद में उन्होंने दरवाजे बंद रखे। परिसीमन का उद्देश्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जनसंख्या के अनुपात में संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। लेकिन अपने घटते जनाधार से घबराए विपक्षी अब देश में उत्तर-दक्षिण विभाजन का खेल खेल रहे हैं। यह झूठा प्रचार कर रहे हैं कि परिसीमन से दक्षिण भारत को नुकसान होगा, जबकि माननीय गृहमंत्री जी ने तथ्यों के साथ स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। विपक्ष यह नजरअंदाज कर रहा है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन सीधे परिसीमन से जुड़ा है; परिसीमन में देरी का मतलब महिलाओं के आरक्षण में देरी है। इसलिए इन विधेयकों का विरोध करना वास्तव में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास है। विपक्ष को लगता है कि वह तकनीकी बहानों से जनता को भ्रमित कर सकता है, लेकिन आज की महिलाएं सब समझती हैं। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति विपक्ष की हताशा का प्रदर्शन था। विपक्षियों को डर है कि यदि महिलाओं को उनके ऐतिहासिक अधिकार मिल गए, तो उनकी बची कुची राजनीतिक जमीन भी खिसक जाएगी। केंद्र एवं प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण, संतुलित प्रतिनिधित्व और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराती है। यह विभाजन या भ्रम पैदा करने का समय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए एकजुट होने का समय है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार महिलाओं के अधिकारों के लिए इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी, ताकि देश की आधी आबादी को उसका हक मिल सके। आने वाले समय में भारत की महिलाएं अपने वोट की ताकत से इन अहंकारी और महिला-विरोधी दलों को राजनीति के हाशिये पर पहुंचा देंगी।
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