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Tuesday, 18th June,
2019
मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी के संतोष मैमोरियल आडिटोरियम में एग्रीटेक, पादप और स्वास्थ्य विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य उद्घाटन बड़े उत्साह और अकादमिक गरिमा के साथ हुआ। सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत के तुरंत बाद कृषि, पादप विज्ञान तथा मानव स्वास्थ्य के बीच अंतर्विषयक संबंधों पर विद्वान वक्ताओं ने अपने ओजस्वी और ज्ञान वर्धक संबोधन से सबको लाभान्वित किया। अपने स्वागत भाषण में संस्कृति स्कूल आफ एग्रीकल्चर के डीन डॉ. के. के. सिंह ने सभी विशिष्ट अतिथियों, प्रतिनिधियों, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने एग्रीटेक, फसल विज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्रों में अकादमिक आदान-प्रदान और सहयोग के एक मंच के रूप में इस सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. एन. एस. राठौर ने "एग्रीटेक, फसल विज्ञान और मानव स्वास्थ्य का एकीकरण" विषय पर अपना संबोधन केंद्रित किया । उन्होंने कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोणों की आवश्यकता के संबंध में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की। उन्होंने कृषि में तकनीकी प्रगति को फसल सुधार रणनीतियों के साथ जोड़ने और मानव स्वास्थ्य तथा कल्याण पर उनके व्यापक प्रभाव के महत्व पर जोर दिया। सम्मानित अतिथि डॉ. ए. के. सिंह, कुलपति, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, ने आयोजकों के प्रयासों की सराहना की और कृषि तथा स्वास्थ्य-संबंधी विषयों के बीच वैज्ञानिक एकीकरण की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया। उनके विचारों ने सम्मेलन के उद्देश्य को और अधिक गहराई तथा प्रोत्साहन प्रदान किया। इस सत्र को सम्मानित अतिथि डॉ. सचिन गुप्ता, कुलाधिपति, संस्कृति विश्वविद्यालय, ने भी संबोधित किया। उन्होंने अंतर्विषयक अनुसंधान की प्रासंगिकता और समाज के लिए ज्ञान-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने में अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उनके शब्दों ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया और इस आयोजन की अकादमिक भावना को सुदृढ़ किया। अध्यक्षीय भाषण संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम. बी. चेट्टी ने दिया। अपने संबोधन में, उन्होंने समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने में नवाचार, अनुसंधान और अकादमिक साझेदारियों के महत्व के बारे में बात की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन बौद्धिक आदान-प्रदान और भविष्य के सहयोग के लिए एक मज़बूत मंच का काम करेगा। उद्घाटन सत्र की मुख्य बातों में से एक पुरस्कार विजेताओं का सम्मान था, जिसमें विशिष्ट व्यक्तियों के योगदान को सराहा गया। सम्मेलन के दौरान डॉ. ऋचा चौरसिया, डॉ. गणेश, डॉ. कोम्बिया, डॉ. स्वीटी, डॉ. सुधांशु, डॉ. स्वाति और अन्य को उनके विशिष्ठ योगदान के लिए पुरुस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता और उपलब्धि को सम्मानित करके सत्र में एक विशेष आयाम जोड़ दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे आयोजन सचिव डॉ. स्वाति दीक्षित ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सम्मेलन के सफल शुभारंभ में अपनी बहुमूल्य उपस्थिति और योगदान के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों, अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों, प्रतिभागियों और सहायक कर्मचारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन की रस्म के साथ हुई, जो ज्ञान और विवेक की विजय का प्रतीक था। सम्मेलन का संचालन संस्कृति विवि कि असिस्टेंट प्रोफेसर शुभांगी सक्सैना ने किया।
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