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Tuesday, 18th June,
2019
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित ‘विकसित भारत 2047 के परिदृश्य में अंतर्राष्ट्रीय लीडरशिप सम्मेलन ’ में विभिन्न देशों से आए अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गजों ने भारत की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने संस्कृति विवि के विद्यार्थियों के बीच लीडरशिप, इनोवेशन, एजूकेशन, कल्चर और एंटरप्रिन्योरशिप को केंद्रित करते हुए वैश्विक नजरिये को बताया। सम्मेलन में बदलती दुनिया में एक मकसद के साथ जुटकर इंसानियत के लिए काम करने की बात की गई। पोर्टियो रीको की डा. वर्जिनिया रिवेरा ने बड़े जोशीले अंदाज में कहा कि दुनिया सिर्फ़ बदलाव देखने के लिए ही नहीं, बल्कि उसे बनाने के लिए भी इकट्ठा होती है। इस साल, भारत दूसरी बार वह जीता-जागता मंच बन रहा है जहाँ लीडरशिप, इनोवेशन, एजुकेशन, कल्चर और एंटरप्रेन्योरशिप मिलकर भविष्य को फिर से लिख रहे हैं। भारत में हमारी यात्रा सिर्फ़ एक ट्रैवल रूट से कहीं ज़्यादा है, यह एक बदलाव को दिखाती है। यूनेस्को हेरिटेज से लेकर रूरल इनोवेशन हब तक, ग्लोबल थॉट लीडर्स से लेकर उभरती युवा आवाज़ों तक, जीएफ2026 इस बात का जश्न है कि जब हम मकसद के साथ एकजुट होते हैं तो इंसानियत क्या हासिल कर सकती है। आज दुनिया को ऐसे लीडर्स की ज़रूरत है जो विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल बना सकें, कल्पना को जगा सकें और मौकों को एक्टिवेट कर सकें। आइए, हम सब मिलकर सुंदर भविष्य बनाएँ।डॉ. वर्जीनिया रिवेरा एक ग्लोबल सोशल एंटरप्रेन्योर, एजुकेटर और महिलाओं के इकोनॉमिक एम्पावरमेंट की सपोर्टर हैं। उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स, इंडिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में कई इनिशिएटिव्स को लीड किया है—एजुकेशन रिफॉर्म, एंटरप्रेन्योरशिप, डिजिटल लीडरशिप और महिलाओं और युवाओं के लिए फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस को सपोर्ट किया है। युनाइटेड नेशंस की ग्लोबल पीस एंबेस्डर डॉ. थेरेसा ए. मोसली एक ग्लोबल लीडर, एजुकेटर, लेखक और एथिकल लीडरशिप और क्रॉस-कल्चरल कोलेबोरेशन में बदलाव लाने वाली आवाज हैं। उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज के जो बच्चे हैं वे दुनिया के बेहतर भविष्य के हकदार हैं। हमें मिलकर उनके लिए दुनिया बेहतर बनानी है। स्वीडन की पर्निला एस. कोरिज़ा ग्लोबल लीडरशिप स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होने कहा कि भारत आने का यह मेरा दूसरा अवसर है। मेरी बचपन से यहां आने की इच्छा रही। उन्होंने संस्कृति विवि के वातावरण की तारीफ करते हुए कहा कि यहां भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वस्तर पर बड़ी चुनौतियां हैं और आपकी शिक्षा आपको इन चुनौतियों से मुकाबला करने की शक्ति देती है। उन्होंने कहा कि सूचना का महत्व है लेकिन उससे ज्यादा महत्व आपके निर्णय का होता है। युनाइटेड नेशंस के पीस एबेस्डर डा. फ्रेडी ली ने कहा कि बदलती दुनियां में जहां चारों ओर युद्ध हो रहे हैं हमें शांति की राह तलाशनी होगी। भारत एक ऐसा देश है जिसने अहिंसा का संदेश दिया है। हम चाहते हैं दुनियां में शांति स्थापित हो। इंग्लैंड की मिस कैटरीना डिक्सन पैटर्सन जो एक सोशल वर्कर हैं, ने कहा कि महिलाओं के लिए भविष्य बहुत उज्ज्वल है। महिलाएं आज सारी दुनियां में हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर काम कर रही हैं। महिलाएं व्यापार कर रही हैं, नौकरियों में भी उनकी बड़ी संख्या है। पैट्रो रीको की एंबेस्डर लुएंडा मोरो ने नीतियों की शक्ति पर जोरदार चर्चा की उन्होंने नीतियों के महत्व को बताते हुए कहा कि नीतियां ही हमारी दिशा तय करती हैं। इटली की एंबेस्डर फ्रांका बोरिजया ने सारे विश्व को स्वर्ग बनाने की बात कही। अमेरिकी एंबेस्डर ट्रेसी इलीने ने बड़े गर्व से कहा भारत मेरा दूसरा घर है। उन्होंने कहा अंतर्राष्ट्री एंटरप्रिन्योरशिप का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने सभी विदेशी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्व बदल रहा है लेकिन मेरा मानना है कि प्यार, संस्कृति और सहयोग अभी भी बदलाव से परे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आप अपना समय नष्ट मत करिए और दुनिया को दिखा दीजिए कि आपके अंदर कितनी सामर्थ्य है। सारी दुनियां आपकी ओर देख रही है। हमको एक दूसरे से सीखते रहना चाहिए। कार्यक्रम के कोर्डिनेटर एडवोकेट पियूष पंडित ने कहा कि भारत सिर्फ़ ज्योग्राफ़िकल बॉर्डर से घिरा एक देश नहीं है; यह दुनिया की सबसे पुरानी जीवित सभ्यताओं में से एक है, जिसका सफ़र तब शुरू हुआ जब ज़्यादातर इंसानियत अभी भी दिशा ढूंढ रही थी। इंडस्ट्रियल क्रांतियों और मॉडर्न इंस्टीट्यूशन्स से बहुत पहले, भारत कॉसमॉस की स्टडी कर रहा था, समय माप रहा था, मैथमेटिकल सिस्टम डेवलप कर रहा था, और इंसानी चेतना की गहराई को एक्सप्लोर कर रहा था। यहीं पर ज़ीरो का कॉन्सेप्ट आया, एक ऐसी खोज जिसने ग्लोबल मैथमेटिक्स और आखिरकार मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी को बदल दिया। पुराना भारत सिर्फ़ स्पिरिचुअल ही नहीं था। यह साइंटिफिक, इंटेलेक्चुअल, इनोवेटिव और ग्लोबली कनेक्टेड था। इतिहास ने इस सभ्यता को बार-बार टेस्ट किया। हमले हुए। एम्पायर बने और गिरे। कॉलोनियल राज ने कहानियों को नया रूप दिया। सीनियर एसोसिएट, डिस्ट्रिक्ट लीगल ग्रुप पीएलएलसी मैथ्यु गिल्बर्ट ईएसक्यू, डॉ. ओलिवर जूनियर रामाब्या जो अफ्रीका में एक गतिशील नेता हैं और युवा सशक्तिकरण, एआई नवाचार आदि को बढ़ावा दे रहे हैं, ने भी अपने विचारों से सम्मेलन को जाग्रत किया। सम्मेलन के प्रारंभ में संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने अपने स्वागत भाषण में सम्मेलन की सफलता के प्रति शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर सभी अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया गया और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। अंत में संस्कृति विवि के प्रति कुलाधिपति डा. रघुराम भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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