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Tuesday, 18th June,
2019
मथुरा। भारत एक देश नहीं बल्कि एक महान सभ्यता है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं। इस पवित्र धरती ने दुनिया को योग, आयुर्वेद, विज्ञान, दर्शन, अध्यात्म और मानवता का मार्ग दिखाया है। आज भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह युवा पीढ़ी नई ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा कर सकती है बशर्ते उसे अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाना होगा। यह सारगर्भित बातें जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने स्वदेशी संकल्प दौड़ के शुभारम्भ अवसर पर उत्साही छात्र-छात्राओं को बताईं। स्वामी विवेकानंद जयंती पर आयोजित स्वदेशी संकल्प दौड़ में शिरकत करने से पूर्व जीएल बजाज के छात्र-छात्राओं ने “तंत्र स्वदेशी मंत्र स्वदेशी भाव स्वदेशी लाना है” गीत का सामूहिक गान किया। प्रो. नीता अवस्थी ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक स्वदेशी साधनों के उपयोग पर बल दें क्योंकि विकसित देश वही होता है जोकि स्वदेशी उत्पादों का उत्पादन करता है। यदि हम दूसरे देशों पर निर्भर रहेंगे, तो वे हमें मजबूरी में ऊंचे दाम पर वस्तुएं बेचेंगे और हमें उन्हें खरीदने की आवश्यकता होगी। छात्र-छात्राओं ने स्वदेशी संकल्प दौड़ में न केवल हिस्सा लिया बल्कि स्वदेशी वस्तुओं को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प भी लिया। प्रो. नीता अवस्थी तथा संस्थान के प्राध्यापकों ने स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर छात्र-छात्राओं को उनके जन्म, उनकी शिक्षा, उनकी तर्कयुक्त बुद्धि, गुरु रामकृष्ण परमहंस से मिलन एवं भारत भ्रमण के पश्चात् शिकागो में दिए गए उनके भाषणों की जानकारी दी। विभागाध्यक्ष प्रो. वी.के. सिंह ने कहा कि विवेकानंद जी के विचार आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्पद हैं। ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत कुमार पांडेय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा पीढ़ी के आदर्श हैं। स्वामी विवेकानंद ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी। विवेकानंद का मानना था कि मनुष्य अपने जीवन में कुछ भी हासिल कर सकता है, बस उसमें दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्मठता होनी चाहिए। एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. शशि शेखर ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे स्वामी के जीवन को ध्येय बनाकर उनसे प्रेरणा लेकर कार्य करें। डॉ. शशि शेखर ने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने हिन्दू धर्म को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी। उन्होंने हिन्दू धर्म को एक सार्वभौमिक धर्म के रूप में प्रस्तुत किया और दुनिया को बताया कि हिन्दू धर्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि एक जीवन जीने का तरीका है। जीवन से हताश व्यक्तियों के लिए विवेकानंद के अनमोल वचन किसी मंत्र से कम नहीं हैं। स्वामी विवेकानंद जी के यह वचन उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत, आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं, ब्रह्मांड की सारी शक्तियां भीतर हैं, शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु, एक विचार को अपनी जिन्दगी बना लो, खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है, सत्य को हजार तरीकों से कह सकते हैं, हर अच्छी बात का पहले मजाक बनता है और जब तक करोड़ों भूखे हैं, मैं हर शिक्षित को देशद्रोही मानूंगा, ये वचन जीवन, शक्ति और आत्म-विश्वास का संदेश देते हैं। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद के अमृत वचनों का न केवल पाठ किया बल्कि उन पर अमल करने का संकल्प भी लिया।
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